बेगम पुरा सहर को नाउ ॥
दूखु अंदोहु नही तिहि ठाउ ॥
"बेगमपुरा सहर" शब्द के भावार्थ :-
“बेगम पुरा सहर” शब्द के भावार्थ :— “बेगम पुरा सहर” शब्द श्री गुरु रविदास जी के गौउड़ी राग के विश्व व्यापी महान शब्द “बेगम पुरा सहर को नाउ ” के बीच अंकित है। यह शब्द धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पृष्ठ संख्या 345 के ऊपर दर्ज है। इस शब्द का रचनाकाल 1300 से 1400 ई तक का बीच का समय है। शब्द है “बेगम पुरा सहर” बेगम से भाव बे+गम अर्थात गम से रहित अर्थात आनंद से भरपूर। पुरा का भाव है, नगर या रहने की जगह। शहर से भाव है, विश्व वतन।
समूचा भाव :– विश्व वतन जिस का नाम बेगम पुरा है, जो परम आनंद से भरपूर है। इस वतन का मनुष्य हर प्रकार के आनंद से भरपूर है। वह सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, धार्मिक आदि हरकिस्म के दुख से मुक्त है और साथ ही चिंता और घबराहट से भी मुक्त है। । विश्व वतन जिस का नाम बेगम पुरा है, जो परम आनंद से भरपूर है। इस वतन का मनुष्य हर प्रकार के आनंद से भरपूर है। वह सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, धार्मिक आदि हरकिस्म के दुख से मुक्त है और साथ ही चिंता और घबराहट से भी मुक्त है।
शब्द अर्थ:-
विश्व-वतन जिस का नाम बेगमपुरा है, परम आनंद से परिपूर्ण है। इस वतन का मनुष्य सामाजिक, सभ्याचारक, विद्यक, धार्मिक आदि हर प्रकार के दुःख से मुक्त है तथा साथ ही चिंता व घबराहट से मुक्त है। विश्व का मनुष्य मानसिक तौर पर स्वतंत्र है। मनुष्य को कर देने की घबराहट नहीं तथा न ही कोई राजा दूसरे राजा को अधीनगी कर (खिराज) देने की चिंता में है। अर्थात् इस पातशाही में (शाश्वत पातशाह के बिना) कोई राजा ही नहीं है। यह सामंती-युग का अन्त है। इस कारण किसी की कोई पैतृक या निजी सम्पत्ति नहीं है। यहां का शहरी आर्थिक तौर पर स्वतंत्र है। यह समाजवादी लोकतंत्र युग है। अतः राजाओं के अत्याचारों का डर नहीं है, वैर-विरोध नहीं है। इस वतन का शहरी निरभऊ तथा निरवैर है, यहां तक कि इच्छाओं पर काबू होने के कारण किसी भी प्रकार की अवनति का डर नहीं है। इस प्रकार यहां का शहरी राजनीतिक तौर पर स्वतंत्र है। परिणामस्वरूप विश्व वतन हर पक्ष से परम आनंद से परिपूर्ण है।। २ ।।
हे मेरे भाई ! अब मैं ऐसे उत्तम वतन का शहरी हूँ, जहां हर प्रकार का, हर पक्ष से उत्तम सुख है, शाश्वत परम आनंद है। अतः यह विश्व मानववादी वतन है, जहां पातशाह तथा प्रजा का रिश्ता शाश्वत सुख, आनंद तथा प्यार वाला है।। २ ।। रहाउ ।।
यह स्थिर, अटल तथा सीमा-रहित शाश्वत पातशाही है। यह रूहानी विश्व-वतन सदा से ही प्रसिद्ध है। इसके शहरी दूसरे, तीसरे दर्जे के नहीं हैं, उनके हर पक्ष से हर क्षेत्र में समानता वाले अधिकार हैं। वह सदाचारक तथा आत्मिक शक्ति में परिपूर्ण, मूलभूत तथा सब्र संतोष वाले, हर पक्ष से संतुष्ट हैं। इस प्रकार यहां तानाशाही नहीं है। यहां विश्व सरकार (World Government) न्याय, समानता तथा प्यार में पैदा हुई है, जिसका भाईचारा सूझ-बूझ, सब्र-संतोष, निरभऊ, निरवैर, सदाचारक तथा आत्मिक शक्ति सम्पन्न है।। २ ।।
बेगमपुरा के रहने वाले जैसे भी वह चाहे आनंद से हर स्थान पर टहलते फिरते हैं। घूमने-फिरने की स्वतंत्रता है (Freedom of Movement) । महलों के पूर्ण भेदी भी उन्हें नहीं रोकते अर्थात् प्रजा, पातशाह के हर रहस्य से परिचित है। पातशाह तथा प्रजा के परस्पर सम्बन्ध गहरे विश्वास तथा प्रेम पर टिके हुये हैं। इस वतन के रहने वाले चमार रविदास “खालसा” फरमाते हैं कि जो भी इस विश्व-वतन का शहरी है, वही हमारा मित्र है, अर्थात् समूचा विश्व समाज मित्रता में बंधा हुआ है, विश्व भाईचारे का आधार केवल तथा केवल आपसी प्यार ही है।। ३ ।।
यह ही विश्व सरकार या विश्व-खालसा राज का आधार है तथा यह ही “बेगमपुरा” है।
"बेगमपुरा सहर को नाउ" शब्द का अंतरीव विचार विधान
इस शब्द में सभी धर्मों, विशेष कर हिंदू धर्म की और सभी राजनीतिक प्रबंधों की पुरानी संस्थाओं को रद्द किया गया है। ये संस्थाएं अतीत में विचर रही हैं। इन संस्थाओं की जगह पर नए प्रबंध स्थापित किए गए हैं। इन के स्थापित होने से ही अतीत में भी चल रही पुरानी संस्थाएं स्वयं ही रद्द हो गई हैं।
अतः बन्द नबर 1 की पहली दो तुकों में सामाजिक, धार्मिक, सदाचारक, विद्यक आदि से संबंधित दुख की मुक्ति का जिक्र है। इस बन्द की पिछली दो तुकों में आर्थिक, राजनीतिक और अन्य इच्छाओं की मुक्ति का जिक्र है। इस बन्द के अतीत में विचर रहे धर्मों के जुल्मों का अंत है। इस बन्द में मनुष्य मानसिक तौर से स्वतंत्र है। सामंतशाही का अंत कर के पैतृक और निजी जायदाद का अधिकार खत्म कर के समाजवादी लोकतंत्र स्थापित किया है। इसी कारण इस विश्व वतन का शहरी निर्भय और निरवैर है। आर्थिक और राजनीतिक तौर से स्वतंत्र है। इसी कारण हर तरफ से धर्म परमआनंद भरपूर है। यह नया संविधान है, विश्व सरकार का।
गुरु रविदास जी ‘रहाउ’ में यह परिपक्व करते हुए परिपक्वता करते हैं, कि मैं इस उत्तम वतन का शहरी हूं। इस तरह वह उपरोक्त विश्व रतन की हकीकत को स्पष्ट करते हैं। विश्व मानववादी वतन के बादशाह का रिश्ता शाश्वत प्यार वाला है।बन्द नंबर 1 में सृजित किया गया है कि विश्व सरकार का संविधान गुरु रविदास जी के विश्व वतन का है, जहां वह रहते हैं।
बन्द नंबर 2 में इस अलौकिक, स्थिर, अटल, असीम और शाश्वत बादशाही के शहरियों के बारे में फरमाते हैं, कि उनके वतन के शहरी रूहानी वतन के निवासी हैं। वे आत्मिक तौर से भरपूर और पदार्थक तौर से सब्र संतोष और संतुष्ट हैं। सो रूहानी वतन के शहरी भी सभ्यचारक और आत्मिक शक्तियों से भरपूर हैं।
बन्द नंबर 3 में गुरु रविदास जी शाश्वत पातशाही और उनके शहरियों के संबंधों के बारे में चर्चा करते हैं कि हर शहरी को हर समय अपने बादशाह को बिना रोक-टोक से मिलने की स्वतंत्रता है, वतन के हर कोने में जाने को स्वतंत्रता है (Freedom of Movement), बादशाह के महलों के बीच हर जगह जाने की स्वतंत्रता है। यह बादशाह और शहरियों की बहुत ही करीबी साझ का प्रतीक है। यह साझ सच्चे सुच्चे प्यार पर टिकी हुई है। इसी तरह ही शहरियों में एक दूसरे के साथ प्यार की सांझ के कारण प्यार से ओतप्रोत भाईचारे का स्वतः ही सृजन हो जाता है। इस तरह विश्व भाईचारे का रिश्ता परस्पर प्यार पर टिका हुआ है। यही प्यार है, जिसने गुरु रविदास जी को चमार होते हुए भी पवित्र खालसा बना दिया है। इस तरह गुरु रविदास जी का मित्र वही हो सकता है, जो इस विश्व खालसा वतन का शहरी हो।
अतः गुरु रविदास जी ने परमआनंद भरपूर बेगमपुरा वतन की समाजवादी, लोकतांत्रिक विचारधारा का सृजन करते हुए, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सदाचारक आदि सिद्धांतों का आधार अध्यात्मबाद को बनाया है। अध्यात्मबाद का मूलभूत आधार सदाचारक और आत्मिक श्रेष्ठता है, जिस के मूलभूत स्तंभ हैं, नियम (दोम ना सेम एक सो आही), सब्र संतोष (मामूर) सति (सदा पातशाही), दया (ना खता कृपा)। इस तरह विश्व वतन का शहरी हर तरफ से संपूर्ण पुरुष है, जिस का विकास समाजवादी लोकतांत्रिक विचारधारा के अनुसार होता है।
यह शब्द गौउड़ी राग में सृजित किए गए शब्दों में से सबसे सिरमौर शब्द है। यह राग की प्रकृति को बहुत ही गंभीरता से सृजन करने में सफल रहा है। इसी कारण यह शब्द इस राग का उत्तम उदाहरण है। इस शब्द का विषय अति गहन व गंभीर है और भारत के प्रसिद्ध संगीत शास्त्रियों के अनुसार भी गौउड़ी गंभीर प्रकृति का राग है।
अतः बेगमपुरा शब्द दुनिया में सृजित शब्दों में से हर तरफ से उत्तम और सर्वोपरि है।